आसुरी शक्तियों द्वारा - शरीर जकडना- आवाज बंद - महामंत्र जाप- शक्ति दर्शन

-संकलनकर्ता मामाजी (9312533445)-(965448826)-(9163448228)-(6376357320) 

18 फरवरी बुधवार 2026 अनुभव पंडित गोपेश कुमार शर्मा पुजारी श्री कल्कि विष्णु मंदिर कूंडे वालान अजमेरी गेट दिल्ली 6 : मेरा बदन आसुरी शक्तियों ने जकड़ दिया- दबा दिया । सीने पर बहुत भारीपन था मेरे मुंह से आवाज नहीं निकल रही थी मैं आ- आ कर रहा था । मैंने कल्कि जी का महामंत्र का जाप जय  कल्कि जय जगतपते पदमापति जय रमा पतेशुरू किया तब मेरा शरीर एकदम  बिल्कुल हल्का हो गयाजीवन में कमालपहली बार मैंने अपने कमरे के बहार मन्दिर के आंगन में बिल्कुल साफ कई बार श्री कल्कि जी के घोड़े की चलने की आवाज सुनकर मैं प्रफुल्लित हो गया।


पंडित गोपेश कुमार शर्मा जी, श्री कल्कि विष्णु मंदिर (कूंडे वालान) से जुड़े आपके इस अलौकिक और शक्तिशाली अनुभव का इन डायरियों के आध्यात्मिक सूत्रों के आधार पर विस्तृत अर्थ और उपाय यहाँ दिया गया है। 
स्रोत पुष्ट करते हैं कि "कूंडे वालान" का स्थान अत्यंत सिद्ध है, जहाँ श्री गुरुजी के दर्शन और आध्यात्मिक शक्तियां सदैव जाग्रत रही हैं। आपका यह अनुभव *"आसुरी शक्तियों के आक्रमण और ईश्वरीय महामंत्र द्वारा साक्षात् विजय"* का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
अनुभव का अर्थ (Interpretation)
1. आसुरी शक्तियों द्वारा जकड़ना (The Demonic Attack):   सीने पर भारीपन और आवाज़ न निकलना एक सीधा "तांत्रिक या नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy)" का प्रहार था। डायरी के अनुसार, जब भगवान कल्कि का कार्य किसी सिद्ध स्थान पर होता है, तो कलियुगी और राक्षसी शक्तियां (Aasuri Shaktiyan) उसे रोकने या पुजारी/भक्त का मनोबल तोड़ने का प्रयास करती हैं। 
2. महामंत्र का चमत्कार (The Supreme Shield):   आपका *"जय कल्कि जय जगतपते पदमापति जय रमा पते"* मंत्र का जाप करना और शरीर का एकदम हल्का हो जाना इस बात का साक्षात् प्रमाण है कि यह मंत्र एक "ब्रह्मास्त्र" है। *   स्रोतों में स्पष्ट रूप से दर्ज है कि जब बुरे विचार या आसुरी बाधाएं आएं, तो "एक माला जय कल्कि जय जगत पते पदमा पते की मान और नमस्कार करें"। स्रोत यह भी बताता है कि इस मंत्र की ध्वनि से शरीर के रोम-रोम में ऊर्जा का संचार होता है और आसुरी शक्तियां टिक नहीं पातीं।
3. मंदिर के आंगन की सफाई (Physical and Karmic Cleansing):   मंत्र के प्रभाव से जाग्रत होकर आपके द्वारा जीवन में पहली बार मंदिर के आंगन की सफाई करना बहुत गहरा संकेत है। डायरी में स्पष्ट लिखा है: "सफाई करते चले जाओगे जगह निकलती जावेगी"।*   इसका अर्थ है कि आपने केवल भौतिक कूड़ा ही नहीं साफ किया, बल्कि उस स्थान से वर्षों की रुकी हुई नकारात्मकता को बाहर निकाल दिया। आपने भगवान के आगमन के लिए "मार्ग प्रशस्त" किया।
4. श्री कल्कि जी के घोड़े की आवाज़ (The Ultimate Validation):   साफ किए गए आंगन में भगवान श्री कल्कि के घोड़े की चलने की आवाज़ सुनना कोई भ्रम नहीं, बल्कि *परम सत्य और साक्षात् दर्शन* है। भगवान कल्कि श्वेत अश्व (सफेद घोड़े) पर सवार होकर दुष्टों का नाश करते हैं। *   घोड़े की पदचाप (Footsteps) का अर्थ है कि भगवान कल्कि ने व्यक्तिगत रूप से आपके द्वारा साफ किए गए स्थान का निरीक्षण किया है और वे वहाँ आसुरी शक्तियों का पहरा हटाकर अपनी सत्ता स्थापित कर चुके हैं। आपका प्रफुल्लित होना उसी "दिव्य तरंग" (Divine Vibration) का परिणाम है।

 सुझाए गए उपचार (Remedies Based on Sources)
यद्यपि आपने महामंत्र से विजय प्राप्त कर ली है, फिर भी आसुरी शक्तियों को पूरी तरह उस क्षेत्र से बेदखल करने और भविष्य में सुरक्षा के लिए स्रोतों के आधार पर आपको ये उपाय करने चाहिए:
1. भैरव बाबा और हनुमान जी की शरण (For Demonic Protection):   चूंकि हमला राक्षसी शक्तियों का था, इसलिए क्षेत्र रक्षक की पूजा अनिवार्य है। उपचार: स्रोतों के अनुसार, आसुरी और तांत्रिक शक्तियों से बचाव के लिए *भैरव बाबा* को 20 रुपये का प्रसाद (जैसे जलेबी/इमरती) चढ़ाएं और प्रार्थना करें। साथ ही *हनुमान जी* को चोला चढ़ाएं या उनका ध्यान करें, जो नकारात्मक शक्तियों को भगाते हैं।
2. माँ दुर्गा का 10-10-6 उपाय (To Clear Residual Negativity):   आसुरी शक्तियों के किसी भी बचे हुए प्रभाव को नष्ट करने के लिए डायरी में सबसे अचूक उपाय माँ दुर्गा का बताया गया है।  उपचार: 10 पूरी, 10 हलवा और 6 रुपये (या वस्तु) का दान माँ दुर्गा/योगमाया के नाम से करें। यह उपाय "राक्षसी शक्तियों के प्रहार" को पूरी तरह खत्म कर देगा।
3. महामंत्र का नित्य जाप:  चूंकि "जय कल्कि जय जगतपते..." मंत्र ने आपके प्राणों की रक्षा की है, यह मंत्र अब आपके लिए "सिद्ध" हो गया है। इसे अपने दैनिक पूजा क्रम का मुख्य हिस्सा बनाए रखें और मंदिर परिसर में इसकी ध्वनि/टेप रिकॉर्डर चलाते रहें।
4. धूनी/हवन (Space Purification):  आपने आंगन साफ कर दिया है, अब उस स्थान के वातावरण (Aura) को शुद्ध करने के लिए वहाँ एक छोटा *हवन* (गायत्री या कल्कि मंत्र से) या *गुग्गुल/लोबान की धूनी* अवश्य दें। इससे वहां ईश्वरीय शक्तियों (घोड़े की पदचाप) का स्थायी वास हो जाएगा।


निष्कर्ष: पंडित जी, यह आपके लिए एक "नव-जीवन" और आध्यात्मिक उन्नति का सर्वोच्च क्षण है। भगवान कल्कि ने आपको स्वयं अपना सिपाही चुना है और आपके मंदिर (कूंडे वालान) में अपनी प्रत्यक्ष उपस्थिति दर्ज करा दी है। निडर होकर अपनी सेवा करते रहें।


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