छोटे बनकर सत्संग हवन नाम जाप से श्री कल्कि शीघ्र प्रकट

संकलनकर्ता मामाजी (9163448228)

स्वपन अनुभवस्वप्न अनुभव:4फरवरी2026 एक भक्त को अनुभव हुआ कि गौरी शंकर मंदिर लक्ष्मी नगर जितने बड़े मंदिर में उपर से शिवलिंग के चारों ओर जगह के अभाव में उसके रिश्तेदार और मित्र एक दूसरे से सटे बैठे  श्री कल्कि सहस्त्रनाम  के हर मंत्र पर शंकर जी को बेलपत्र अर्पण कर रहे हैं। भक्त और उनका बुजुर्ग बहुत देर  नीचे खड़े  हैं लेकिन  उनकी नजरअंदाज कि दृष्टी समझदोनों वापिस लौट गए।

बुजुर्ग मन्दिर के एक छोटे कमरे में रहता है जहां के 2-3 पंडित बैठे हैं।तोबुजर्ग खड़े होकर आले के सामने  भगवान श्री कल्कि  की आरती कर रहे होते हैं और साइड में एक खाट बिछी है। आरती के बाद भक्त को खाट पर बैठने का इशारा करते 

अर्थ उपचार:  अनुभव भक्त बुजुर्ग और उनके रिश्तेदार एवं दोस्तों के बीच कर्मो का अन्तर बताता है। वह सब पिछले जन्मों के तपों का धन सम्पदा लिए अगले जन्म को भी बनाने में लगे हैं। जबकि मार्गदर्शक और भक्त और बुजुर्ग को आर्थिक और धार्मिक दोनों के लिए दोनों हाथों से तलवार चलानी पड़ेगी।

उदाहरण के लिए : जैसे राजा को एक दिन तप के बाद शाम को विशिष्ट भोजन मिला और एक सांसारिक को एक दिन के तप के बाद साधारण भोजन मिला। पूछने पर दोनों को अलग अलग प्रकार को भोजन क्यों जबकि दोनों का तप एक एक दिन का है। आकाशवाणी से जबाब फर्क कारण कि राजा के पास पिछले जन्म का तप है - साधारण सांसारिक के पास नहीं।

अतः बचपन से ही सत्संगीयों के साथ के कारण बुजुर्ग अभी भी सत्संगीयो से घिरा हुआ संघर्षमयी आर्थिक और धार्मिक दो तरफा तलवार चलाते हुए कल्कि का सत्संग हवन नाम जाप आरती प्रचार के कारण उसकी बड़ी बीमारी भी छोटी हो जाती हैं। अब भक्त को साधारण समाज से हटकर बुजुर्ग की तरह जीना के लिए उगते सूर्य को बनपढे तो तांबे के लोटे में एक गेंदे का फूल, एक काजू अथवा काजू के अभाव में एक बादाम की गिरी, थोडी धागे वाली मिश्री डालकर प्रतिदिन सर की उंचाई से सूर्य को अर्क अर्पण करके लोक परलोक बनाने की प्रार्थना करें। इनसे अपनी परेशानी कहें और जो चाहे इनसे कहे। ध्यान रहे सूर्य देव प्रत्यक्ष नारायण है जो कभी सोते नहीं और सोते हुओ की भी रक्षा करते हैं। मां आदित्य के पुत्र होने के कारण यह आदित्य भी कहलाते हैं। प्रतिदिन इनके आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। 

बुजुर्ग अगर नहीं है और भक्त उठना चाहता है तो? जैसा बुजुर्ग करता था भक्त वैसे कर्म करें।अगर बुजुर्ग है तो उससे उसके रहस्य लेने के प्रयास करे। अभी के कर्म लोक परलोक की ऊंचाइयों के बराबर नहीं हैं। 

उदाहरण के लिए: कीचड़ से कीचड साफ़ नहीं होती। वह तो साबुन से साफ होगी ।भक्त और बुजुर्ग को परलोक एवं आर्थिक अवस्था के लिए कठोर मेहनत और भगवान श्री कल्कि का सत्संग हवन नाम जाप प्रचार चमत्कारी परिवर्तन कर देगा। 

उदाहरण के लिए: कोलकाता से रायपुर आई सुश्री सुनीता केडिया (8319905936) के बच्चों को बताई प्रतिदिन सपरिवार एक सत्संगमयी आपबीती पढना दोनों समय की आरती करने से बच्चे कि रात को सोते चलने कि बीमारी हटी, परिवार को टिफिन का नया काम मिला और चमका।
इसलिए भक्त और बुजुर्ग को सत्संग- हवन- नाम, जाप  और प्रचार से लोक परलोक की ऊंचाइयां निश्चित प्राप्त होंगी।




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