कल्कि जी के पास उपचारों अनुभवो द्वारा सब संकटों को दूर करने की ताली  हैं

संकलन कर्ता मामाजी (9312533445)-965448826-9163448228-(9036460444)

महिमा जी बैंगलुर, 10 अप्रैल 2026, सुबह  ४-५ बजे, मानसिक अनुभव कि कल्कि भगवान के पास हर ताले की चाबी है। मुझे इस पर भजनों के साथ लिख कर भक्तों के  रास्ते के लिए आगे भेजना है।

अर्थ उपचार :

महिमा जी आपके अनुभव के हिसाब से भगवान श्री कल्कि महाविष्णु का अंतिम अवतार हैं, जो कलियुग (अंधकार युग) का अंत करके सत्ययुग स्थापित करेंगें। उन्हीं के पास हमारी सभी समस्याओं का हल है। कोई माने या ना मानेश्री कल्कि को खुश करना आसान होता है संकल्प उपचार से सब काम होता है।
*महिमा जी*  हमारे पास सब कुछ होते हुए भी - हम अपने जीवन की समस्याओं में इस कदर उलझ जाते हैं कि हमें बाहर निकलने का  रास्ता नहीं  दिखता। क्योंकि हम *भौतिक साधनों  से* समाधान खोजते हैं? लेकिन असली "चाबी" भगवान् श्री कल्कि के पास है तभी तो एक नहीं उपर्युक्त तीन ग्रंथों में आप पायेंगी कि अनेकों कल्कि वाले  देखते देखते असम्भव को सम्भव करके कलयुग के  चक्रव्यूह से निकल गये।🔑


🪷 महिमा जी, वास्तव में हमारी जिंदगी के ताले बहुत पुराने हो गए हैं । *कुछ हमारे कर्मों के हैं, तो कुछ हमारे डर, अहंकार और अज्ञानता के कारण हैं*। - लेकिन कल्कि जी के महज़ 21 बार महामंत्र *जय कल्कि जय जगत्पते पद्मावती जय रमापते* के जाप ,उपचारों वा संकल्पों से उपर्युक्त कल्कि भक्तों कि  सभी जटिल समस्यायें  श्री कल्कि नाम की 'मास्टर चाबी से खुल गये। महिमा जी, भगवान् श्री कल्कि की रत्न स्वरूपा तलवार सिर्फ बुराईयों को नहीं बल्कि हमारी उलझनों के परदों को भी ख़त्म करती है। यही नहीं महिमा जी, जब हम  श्री कल्कि को पुकारते हैं, तो हमारे अन्दर से सोई हुई चेतना जागती है। यही वह चाबी है जो उज्जवल भविष्य को अनुभवों द्वारा एक के बाद एक द्वार खोलती चली जाती है।बस इसमें अनुभव का अर्थ निकालते हुए स्वप्न अनुभव एक संपदा ग्रंथ जो 2010 में छपा है उसके पृष्ठ नंबर पांच मानु मैं ना मानूं के हिसाब से अर्थ उपचार संकल्प प्रार्थना करें।

भले ही लॉक (ताला)बड़ा हो, जब चाबी कल्कि जी के हाथ में है, तो डरने की क्या बात है ? 🔏 जैसे आपको भगवान ने भजन के लिए कहा है तो प्रस्तुत है श्री कल्कि द्वारा अनुभव में यह चार भजन । बनपढे समय निकाल कर स्वयं एवं औरों को भी अर्थ बताकर गायन करें। 

1. डर के लिए : भजन नम्बर 23 जय हो भय के भय कल्कि, जय असुरन के क्षय कल्कि।

2. सुबह और शाम भगवान श्री कल्कि का दरबार खोलते समय यह भारत सरकार कि समस्याओ और मुकदमों से छुटकारा दिलवाती है। गाय जा- गाए जा- गाए जा कल्कि नाम प्यारा। सुमिरन में है सच्चाई संसार में है धोखा।गाये नाम प्रभु का ,पाएगा सुख अनोखा।

3. तीन नंबर भजन असवाद (डिप्रेशन): श्वास में सुमिरन समा गया जब नाम हरि का रटा गयाचार नंबर भजन जब भी मन बिना बात के सब कुछ होते हुए दुखी हो : जो हरि सुमिरन करता है दुष्कर्मों से डरता है वह भक्तावर होकर निडर भवसागर से तरता है।

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