11 Feb
11Feb

सत्संग- हवन - नाम जाप

सत्संग में सुनी अनेको में से याद आई निजाम और भामाशाह की कथा

बचपन में गुरुवर लक्ष्मी नारायण जी सत्संग में किसी भी ग्रंथ पद्म पुराण -श्री मद्भागवत आदि  का पाठ शुरू करके फिर प्रसंगानुसार कोई भी दिलचस्प कथा सुनाते थे और बड़ा मजा आता था।खाटू श्याम धाम में कल्कि धाम बनने में गुरुवर कि दो कथाओं का कमाल है कि जब निजाम भिस्ती पानी भरने वाले ने जब राजा हिमायू को डूबते बचाया तो उसने उसे एक दिन का राजा बना दिया।बस फिर क्या था उसने गद्दी पर बैठते ही सब भंगीयो कि मस्क पर एक-एक सोने कि गिन्नी लगाने का हुक्मनामा जारी कर दिया।वैसे ही जैसे ही खाटूश्याम धाम के प्रधान श्री धनश्याम गुप्ता जावेरी जी ने मुझे श्री कल्कि धाम के लिए एक निश्चित राशि मांगी मैंने तुरंत हां कर दी। घर आते ही भामाशाहकि कथा के अनुसार मैंने बुढ़ापे के लिए रखी अपनी फिक्स डिपॉजिट सार्टिफिकेट निकाले।उसका उसको अर्पण

बायें से दाएं श्री पवन सिंघल (राष्ट्रीय महामंत्री) श्री अनिल गुप्ता(राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष) गुरुवर काअदना सा शिष्य (मामाजी) श्री राजेंद्र गोयल(राष्ट्रीय मंत्री) श्री दया शंकर गुप्ता)(राष्ट्रीय वरिष्ट उपाध्यक्ष)

बात यहीं पूरी नहीं हुई यहां कि टीम ने ग्रीन वैली जहां सुबह से रात्री तक भक्त अनेकों व्यंजनों का स्वाद लेते रहते हैं वहां धाम दान दाताओं के बीच मेरी बड़ी फोटो लगा दी।इसको हटाने के और उसकी जगह श्री कल्कि कि फोटो बदलवाने की पुनः संघर्ष के साथ सेवा करनी पढी -मै तो कुछ दिन का मेहमान हूं -मेरे श्री कल्कि तो शाश्वत हैं।

आगे क्या कहूं मैं तो गुड़ का गुड रहा रहा प्रधान श्री घनश्याम गुप्ता जावेरी तो शक्कर हो गये- जिनके साथ श्री कल्कि दो दिन रहें और एक किलो स्वर्ण बीस हजार किलो कि ढलाई होते समय मूर्ति में डलवा गये।

बीस हजार किलो कि अष्टधातु अपने एक किलो स्वर्ण लिए 56 फुट उंचाई पर लगी जीटी करनाल रोड हाई वे से खाटूश्याम में नवनिर्मित कल्कि धाम में दर्शनीय 24×365 भक्तों कि मनोकामना पूरी करने के लिए लगी भगवान् श्री कल्कि की मूर्ति जय -विजय द्वारपालों के साथ

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