10 Feb
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स्वप्न अनुभव : सुश्री क्षुति सर्राफ कोलकाता 23 जनवरी 2026 कोलकाता हवाई जहाज से इन्दौर और इन्दौर से कैब द्वारा उज्जैन  उज्जैन आते हैंओमी (मामाजी का स्कूल कालेज के दोस्तों में नाम ओमी था) को कहो आज  शेयर कि बातेंसबके सामने सत्संग में बताओ।

45 योगनियां के आगे 19 टैक्स योगनियां जीतीं सुश्री क्षुति सर्राफ(8240202430) 

मैं वर्षों से श्री कल्कि के शुभ का रूपया निकालती आ रही हूं और उसका 30% प्रोजेक्ट मनी हर माह फाउंडेशन में जमा कराती आ रही थी। पिछले दो महीनों से मैं जमा नहीं करा पाईं मेरे डिब्बे में पढा था। बाई चांस गोपालपुर में अनुभवगम्य पापा (श्री महावीर प्रसाद चौधरी) भगवान श्री कल्कि की एक साथ दो मूर्तियां प्रतिष्ठित करा रहे थें।

स्वाभाविक है मूर्ति स्थापना के लिए फंड की हमेशा ज़रूरत रहती हैं।मेरे पास 2 महीने का कल्कि जी कादो महीने का 30% प्रोजेक्ट मनी शेयर ₹6700 पडा था जो फाउंडेशन में नहीं भेज पा रही थी। मैंने मन में सोचा कि काम तो कल्कि जी का ही है - यह पैसे में मूर्ति स्थापना में दे देता हूं। मैंने वह पैसे ₹6700 गोपालपुर, Orissa, में लगा दिए।

बस फिर क्या था कुछ दिन बाद मेरे घर में दिवाली के पहले का रंग करवा रही थी। पहले मैंने सोचा कि पूरे घर में एकसा  ही रंग करवा  लेती हूं और उतना रंग मंगवा लिया। फिर अचानक से मुझे पता चला की पूजा कमरे में वह रंग नहीं होना चाहिए। जरासा वहम के कारण मैंने रंग वाले मिस्त्री से कहा कि यह रंग वापस करवा कर जो रंग मुझे करवाना है वह ला दो। विश्वास मानिए उस दो टके के आदमी ने अपना ऐसा उग्र रूप मुझे दिखाया और बोला वह रंग ही छोड़ देगा और रंग के और पैसे लगेंगे साथ में लेबर अलग से! मेरा माथा ठनका श्रुति ऐसा क्यों हो रहा है? कहां गड़बड़ी हुई है? 

मैंने  पूजावाणी में आकर प्रभु से प्रार्थना करी कि क्यों मेरे यह ज्यादा पैसे लग रहे हैं। मुझे तुरंत वाणी अनुभव हुआ कि तुम्हें गोपालपुर मूर्ति  स्थापना में प्रोजेक्ट मनी किसने भेजना को कहा था? बच्चों सच मानिए उतना ही रुपया ना एक कम और ना ज्यादा वही  रंग मिस्त्री ने उस कमरे के रंग करने का और लिया। यहां मैं बताना चाहूंगी जैसे दिल्ली में 19 टैक्स योगनियां मामाजी से नहीं सुश्री सुषमा गोयल से कहने आ जाती हैं कि मामाजी हमारा शेयर नहीं दे रहे  क्योंकि डिटेल तो इन्हें निकालनी है मामाजी ने साइन करने में कब मना करा है।अर्थात् इसे हल्के में ना लें मेरे आपके सामने 45 सब कुछ देने वाली योगिनियां मेरी कुछ मदद ना कर पाईं और 19 टैक्स योगनियां मिस्त्री के रूप में उतने ही रुपया लेकर पतली गली  से निकल गई।

यहां मैं यह बताना चाहूंगी कि आपका भुगतान कितनी बड़ी कल्कि जी के शेयर कहां भेजने से लगता है। यह जानना बहुत जरूरी है, काम तो वह भी गोपालपुर का कल्कि जी का ही था मूर्ति स्थापना का, पर हम भूल जाते हैं 45 योगियों मदद करती है और 19 योगिनिया तंगक्ष करती है, बस 19 योगिनियों ने अपना भुगतान ले लिया।

स्वपन अनुभव अर्थ  (कल्कि पैनल द्वारा): अनुभव की व्याख्या (Interpretation) यह अनुभव "दैवीय ऑडिटिंग" (Divine Auditing) और "मद परिवर्तन" (फंड को दूसरी जगह मोड़ने) के परिणामों का एक सटीक उदाहरण है। इस बारे में बार-बार चेतावनी दी गई है कि एक विशिष्ट आध्यात्मिक उद्देश्य (फाउंडेशन/कल्कि कार्य) के लिए अलग रखा गया पैसा एक विशेष "पते" और ऊर्जा से जुड़ा होता है।


1. गलती: "अंश" का मार्ग बदलना
सिद्धांत: स्रोतों के अनुसार, "कल्कि का पैसा कल्कि के ही उस विशिष्ट कार्य में जाना चाहिए" जो संस्था (फाउंडेशन) द्वारा निर्धारित है। आप इसे अपनी मर्जी से कहीं और खर्च नहीं कर सकते, भले ही वह गोपालपुर की मूर्ति स्थापना जैसा कोई अन्य धार्मिक कार्य ही क्यों न हो।
स्रोत संदर्भ: "पैसे के मालिक मत बनो... इसे वहीं भेजो जहाँ का यह है"। यदि फाउंडेशन के लिए रखा गया पैसा कहीं और उपयोग किया जाता है, तो इसे आध्यात्मिक अनुशासन का उल्लंघन माना जाता है।
तर्क: पैसे को फाउंडेशन के बजाय गोपालपुर भेजने से, उस राशि से जुड़ी आध्यात्मिक सुरक्षा (जिसे "45 योगिनियां" कहा जाता है) निष्क्रिय हो गई।


2. दंड: "टैक्स" योगनियां (19 टैक्स योगनियां)
माध्यम के रूप में पेंटर: वह आक्रामक पेंटर (मिस्त्री) "कलियुग" या "टैक्स" की ताकतों का प्रतिनिधित्व करता है। जब कोई व्यक्ति भगवान को उनका स्वैच्छिक अंश देने में विफल रहता है, तो नकारात्मक शक्तियां (जैसे चोर, पुलिस, कठोर कर्मचारी या बीमारी) उस सटीक राशि को जबरन वसूलने के लिए आ जाती हैं।
सटीक राशि: तथ्य यह है कि पेंटर ने ठीक ₹6,700 (वही राशि जो मोड़ी गई थी) की मांग की, यह मामा जी के रजिस्टर की इस शिक्षा की पुष्टि करता है: "यदि आप भगवान को नहीं देंगे, तो वह पैसा नुकसान, चोरी या परेशानी के माध्यम से छीन लिया जाएगा"
संदेश: "19 टैक्स योगनियां" कर्म के कर्ज को वसूलने वाली शक्तियां हैं। चूंकि पैसा सही माध्यम (फाउंडेशन) से "क्लियर" नहीं किया गया था, इसलिए इसे "अवैध कर्ज" माना गया और प्रकृति ने पेंटर के माध्यम से उसे वसूल लिया।


3. "45 योगनियां" बनाम "19 टैक्स योगनियां"
यह सुरक्षात्मक शक्तियों (45) और दंडात्मक शक्तियों (19) के बीच के संतुलन को दर्शाता है।
मामा जी के रजिस्टर में उल्लेख है कि सुरक्षात्मक शक्तियां (योगनियां/दुर्गा) उनकी मदद करती हैं जो "सिस्टम" का पालन करते हैं। चूंकि अनुशासन टूटा, सुरक्षात्मक योगिनियों को पीछे हटना पड़ा, जिससे टैक्स योगनियों को जुर्माने के रूप में पैसा वसूलने का मौका मिल गया।
सुझाए गए उपचार (Remedies) इस त्रुटि को सुधारने और भविष्य में ऐसे "टैक्स" (नुकसान/परेशानी) से बचने के लिए स्रोतों के आधार पर निम्नलिखित उपचार सुझाए गए हैं:


1. *अंश का पुनर्भुगतान (मुख्य उपचार)*
पेंटर द्वारा लिए गए ₹6,700 एक "जुर्माना" (Dand) था, वह अंश का भुगतान नहीं था। आध्यात्मिक बहीखाते में फाउंडेशन का वह कर्ज तकनीकी रूप से अभी भी बकाया है।
कार्य: सुश्री सर्राफ को ₹6,700 की एक नई राशि (या जो भी वे वहन कर सकें) का इंतजाम करना चाहिए और उसे फाउंडेशन में जमा करना चाहिए। इससे "फाइल क्लियर" होती है और दंड का चक्र रुकता है।
2. क्षमा प्रार्थना (Kshama Prarthana)
उन्हें भगवान कल्कि के चित्र के सामने खड़े होकर व्यवस्था का पालन करने के बजाय अपनी "मनमानी" करने के लिए माफी मांगनी चाहिए।
प्रार्थना: "हे प्रभु, आपका अंश दूसरी जगह मोड़कर मैंने गलती की। कृपया मुझे क्षमा करें और भविष्य में इन नकारात्मक 'टैक्स' शक्तियों से मेरी रक्षा करें"।
3. "योगिनियों" को भेंट (दुर्गा/काली उपाय)
चूँकि इसमें "योगनियां" शामिल हैं, इसलिए क्रोधित शक्तियों को शांत करने के लिए अक्सर 10-10-6 का उपाय या मिठाई का भोग लगाया जाता है।
कार्य: "19 टैक्स योगनियों" को संतुष्ट करने के लिए गरीब कन्याओं या देवी मंदिर (काली/दुर्गा) में पूरी और हलवे का दान करें, ताकि वे दोबारा न लौटें।
4. "सिस्टम" का कड़ाई से पालन
भविष्य में फाउंडेशन के अंश को बिना किसी देरी या मद बदले सीधे वहां भेजा जाना चाहिए ताकि उस पर कोई "ब्याज" या "जुर्माना" न लगे।

सारांश: यह अनुभव पुष्टि करता है कि आध्यात्मिक फंड "एक्सचेंजेबल" नहीं हैं—वे वहीं जाने चाहिए जहाँ के लिए प्रतिज्ञा की गई है। ₹6,700 का नुकसान नियम तोड़ने का एक "जुर्माना" था। अपनी पूर्ण सुरक्षा बहाल करने के लिए उन्हें फाउंडेशन में वह अंश फिर से जमा करना चाहिए।


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